आपबीती! मुर्दाघर में काम करने वाले की, जानिए- कैसा होता है लाशों के बीच रहना

मॉर्चुरी के भीतर रहना किसी रेफ्रिजरेटर में बसने जैसा है. 'जितेंद्र चौहान' लगभग चार से पांच डिग्री तापमान पर रोज आठ से दस घंटे बिताते हैं.

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